Share Market में ट्रेडिंग पर SEBI का बड़ा फैसला, Investors का क्यू टूटा सपना

Share Market Updates on SEBI बाजार में पैसा लगाने वालों को एक बड़ा झटका लगा है। यह बड़ा झटका उन इन्वेस्टर्स को लगा है जो Futures and Options में कारोबार करते हैं। दफ्तर के कामकाज में बिजी रहने वाले तमाम लोग सुबह सवा से दोपहर 3:30 बजे तक मुश्किल से ही बाजार में खरीद-फरोग कर पाते हैं। ऐसे में इन्हें एक उम्मीद पैदा हुई थी कि शायद उन्हें इस वक्त के बाद भी बाजार में सौदे करने का मौका मिल सकता है। ऐसा हो तो ऑफिस या दूसरे कामकाज में व्यस्त रहने वाले लोग तसल्ली से बाजार में futures and options सेगमेंट में ट्रेडिंग कर सकते हैं।
इसकी उम्मीद तब पैदा हुई जब स्टॉक मार्केट एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने एक प्रस्ताव भेजा था। NSE ने ट्रेडिंग के घंटे बढ़ाने का प्रस्ताव मार्केट रेगुलेटर SEBI के पास भेजा था। ट्रेडिंग का यह एक्सटेंशन डेरिवेटिव सेगमेंट के लिए मांगा गया था। अब इस मामले में एक बड़ा अपडेट आया है, जिसने इन्वेस्टर्स को थोड़ा निराश कर दिया है। सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया, यानी SEBI, ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के डेरिवेटिव सेगमेंट में ट्रेडिंग के समय को बढ़ाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

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ब्रोकरों की सहमति की कमी: SEBI के ठंडे बस्ते में प्रस्ताव

असल में इस मामले में ब्रोकरों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई और इस वजह से SEBI को इस प्रस्ताव को एक ठंडे बस्ते में डालना पड़ा है। NSE के सीईओ आशीष कुमार चौहान ने पोस्ट-आर्निंग कॉल में बताया कि मौजूदा वक्त में ट्रेडिंग के टाइमिंग को बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है, क्योंकि SEBI ने हमारी एप्लीकेशन को खारिज कर दिया है।

ब्रोकरों की सहमति की कमी: NSE के प्रस्ताव का विरोध

इसकी वजह यह लग रही है कि शायद स्टॉक ब्रोकरों से SEBI को वैसा फीडबैक नहीं मिला था जिसकी उम्मीद थी। NSE ने SEBI से अनुरोध किया था कि शाम को 6:00 बजे से रात के 9:00 बजे तक तीन अतिरिक्त घंटों के लिए डेरिवेटिव्स मार्केट को ओपन रखा जाए, ताकि मार्केट पार्टिसिपेंट्स ग्लोबल एक्टिविटी के हिसाब से ट्रेडिंग के फैसले ले सकें। NSE का प्लान पहले चरण में एफएओ सेगमेंट में शाम को 6:00 से 9:00 बजे तक ट्रेडिंग की इजाजत देने का था, दूसरे चरण में इसे रात के 11:30 बजे तक बढ़ाने का था, और तीसरे चरण में कैश मार्केट के घंटों को शाम के 5:00 बजे तक बढ़ाने की मांग की गई थी।

वैश्विक बाजारों की प्रतिक्रिया: ट्रेडिंग टाइमिंग में बदलाव के पीछे का कारण

टाइमिंग को बढ़ाने के पीछे मकसद यह था कि अगर ग्लोबल मार्केट्स में से कोई नेगेटिव न्यूज़ आती है, तो ट्रेडर्स इसके हिसाब से हेजिंग कर सकें। भारत में शेयर बाजार दोपहर 3:30 बजे बंद हो जाते हैं, जबकि यूरोप में इस दौरान मार्केट खुलते हैं और अमेरिका में बाजार भारतीय वक्त के हिसाब से करीब 7 बजे ओपन होते हैं। इसी साल की शुरुआत में स्टॉक ब्रोकर्स के एसोसिएशन Anmi ने NSE के FFO सेगमेंट में ट्रेडिंग की टाइमिंग बढ़ाने के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी थी। हालांकि, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ब्रोकर्स फोरम BBF इस एक्सटेंशन के खिलाफ था। मार्केट रेगुलेटर SEBI ने तीन ब्रोकर्स एसोसिएशन के मेंबर्स वाला एक ब्रोकर्स इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स फोरम आईएसएफ बनाया था, ताकि इस मामले में एक आम राय बनाई जा सके। हालांकि, आईएसएफ ने FFO सेगमेंट में ट्रेडिंग के घंटे बढ़ाने के प्रस्ताव का न तो समर्थन किया था और न ही इसे खारिज किया था।

डेरिवेटिव्स मार्केट में ट्रेडिंग की टाइमिंग: बढ़ता जोखिम और चुनौतियाँ

इंडस्ट्री की एक राय यह भी है कि क्योंकि एफएओ सेगमेंट में बेहद स्पेक्युलेटिंग भरा होता है, ऐसे में इसकी टाइमिंग बढ़ाना अभी फिलहाल ठीक नहीं होगा। मार्केट रेगुलेटर से भी इस बात को लगातार इन्वेस्टर्स को आगाह करता रहा है कि डेरिवेटिव्स में पैसा लगाने वाले 10 में से नौ लोगों को लॉस होता है। इसके बावजूद, इस सेगमेंट में पैसा लगाने वाले और ज्यादा रिस्की दाम लगाने वालों की तादाद लगातार बढ़ रही है। फिलहाल ऐसे इन्वेस्टर्स के लिए यह एक बड़ा झटका है, जो Futures and Options में पैसा लगाकर फटाफट कमाई करना चाहते हैं। ट्रेडिंग की टाइमिंग बढ़ने से इसमें और ज्यादा वॉल्यूम आने की भी संभावना है। डेरिवेटिव सेगमेंट में कारोबार पर NSE का दबदबा है और BSE इस सेगमेंट में कारोबार में धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रहा है। लेकिन अब SEBI ने NSE के ट्रेडिंग की टाइमिंग बढ़ाने का प्रस्ताव खारिज कर दिया है और इस पर अड़ंगा लगा दिया है। आगे देखना यह होगा कि इस मामले में किस तरह के और अपडेट्स आते हैं। हमने यह पूरी खबर आपकी जानकारी के लिए बनाई है। आपका इस खबर पर क्या कहना है, हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं।

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