UGC द्वारा डिफॉल्टर घोषित 18 यूनिवर्सिटीज कमी और संभावित कदम

 यूनिवर्सिटी ग्रांड कमीशन (यूजीसी) ने देशभर में 400 से अधिक यूनिवर्सिटीज को डिफॉल्टर घोषित किया है, जिसमें से 18 यूनिवर्सिटीज मध्य प्रदेश की हैं। इस रिपोर्ट में हम इन यूनिवर्सिटीज की कमियों और उनमें हो रही उपाधी निर्धारण की दिशा में विस्तार से जानकारी प्रदान करेंगे।

“मध्य प्रदेश की 18 यूनिवर्सिटीज: यूजीसी के डिफॉल्टर घोषणा के पीछे की कहानी”

यह लेख हाल ही में यूनिवर्सिटी ग्रांड कमीशन (UGC) की घोषणा पर ध्यान केंद्रित करता है जिसमें 400 से अधिक यूनिवर्सिटियों को डिफॉल्टर घोषित किया गया, इसमें 18 मध्य प्रदेश की यूनिवर्सिटियां शामिल हैं। लेख उन प्रभावित संस्थानों पर प्रकाश डालता है, जो UGC के निर्णय के पीछे के कारणों पर प्रकाश डालता है। रिपोर्ट लोकपाल की नियुक्तियों और अनुदान कमी के कारणों पर केंद्रित है, इन विश्वविद्यालयों के लिए संभावित परिणामों को खोजता है। लेख यूजीसी द्वारा लोकपाल की नियुक्ति का समय-सीमा नहीं पूरा होने पर की जा सकने वाली कड़ी कदमों के साथ समाप्त होता है।

मध्य प्रदेश से जुड़ी 18 यूनिवर्सिटीजों में शामिल हैं:

1. अटल बिहारी वाजपेई हिंदी विश्वविद्यालय, भोपाल

2. अवधेश प्रताप सिंह यूनिवर्सिटी, रीवा

3. धर्मशास्त्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, जबलपुर

4. डॉक्टर बी आर अंबेडकर यूनिवर्सिटी ऑफ सोशल साइंस, इंदौर

5. जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर

6. जीवाजी यूनिवर्सिटी, ग्वालियर

7. मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी, जबलपुर

8. महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, छतरपुर

9. महर्षि पाणिनी संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन

10. महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय, चित्रकूट

11. माखन लाल चतुर्वेदी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन, भोपाल

12. नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्व विद्यालय, जबलपुर

13. पंडित एसएन शुक्ला यूनिवर्सिटी, शहडोल

14. राजा मान सिंह तोमर म्यूजिक एंड आर्ट्स यूनिवर्सिटी, ग्वालियर

15. राजा शंकर शाह यूनिवर्सिटी, छिंदवाड़ा

16. राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भोपाल

17. रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर

18. सांची यूनिवर्सिटी ऑफ बुद्धिस्ट इंडिक स्टडीज, भोपाल

यूजीसी द्वारा डिफॉल्टर घोषित होने के बाद इन यूनिवर्सिटीज में लोकपाल की नियुक्ति और अनुदान में कटौती की जा रही है। यदि इनमें लोकपाल की नियुक्ति 31 दिसंबर तक नहीं होती है, तो यूजीसी कई कदम उठा सकती है। यह रिपोर्ट इस स्थिति को गहराई से समझाने का प्रयास करती है।

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